बहुत समय पहले की बात है। पहाड़ों और घने जंगलों से घिरे एक छोटे-से गाँव में राहू नाम का एक गरीब लकड़हारा रहता था। उसकी झोपड़ी मिट्टी और लकड़ी से बनी थी, लेकिन उसमें रहने वाला दिल बहुत बड़ा था। राहू का जीवन सरल था—दिन भर जंगल में लकड़ी काटना और रात को अपने इकलौते बेटे अविर के साथ बैठकर तारों को निहारना। लेकिन किस्मत ने उस सादे जीवन पर गहरी चोट की थी। अविर कई महीनों से एक रहस्यमय बीमारी से पीड़ित था। गाँव के वैद्य, तांत्रिक और पुजारी—सब हार मान चुके थे। अविर की साँसें दिन-प्रतिदिन कमजोर होती जा रही थीं।
एक रात, जब अविर तेज़ बुखार में काँप रहा था, राहू ने आकाश की ओर देखकर रोते हुए प्रार्थना की—
“हे ईश्वर, मेरे प्राण ले लो, पर मेरे बच्चे को बचा लो।”
उसी रात, सपने में उसे एक बूढ़ा साधु दिखाई दिया, जिसके हाथ में चमकता हुआ प्राचीन नक्शा था। साधु ने कहा—
“यदि तू अपने पुत्र को बचाना चाहता है, तो तुझे प्राचीन वन में जाना होगा। वहाँ अमरता का रहस्य छिपा है, लेकिन याद रखना—अमरता वस्तुओं में नहीं, भावना में छिपी है।”
सुबह राहू की नींद खुली तो उसकी झोपड़ी के बाहर वही नक्शा पड़ा था। डर, आशा और प्रेम—तीनों भावनाएँ उसके दिल में एक साथ उमड़ पड़ीं। बेटे के माथे को चूमकर वह अमृत की खोज में निकल पड़ा।
खोज – तीन जादुई वस्तुएँ और खतरनाक रास्ते
प्राचीन वन साधारण जंगल नहीं था। पेड़ों की छायाएँ जीवित लगती थीं, और हवा में रहस्य तैरता था। नक्शे के अनुसार, अमृत तक पहुँचने के लिए राहू को तीन जादुई वस्तुएँ खोजनी थीं—
🔹 चंद्रमा का दर्पण
🔹 सूर्य की धूपघड़ी
🔹 तारों का जल
पहली परीक्षा थी चंद्रमा का दर्पण। यह दर्पण केवल उसी को दिखाई देता था, जिसका मन सच्चा हो। एक झील के किनारे पहुँचते ही राहू को अपने जीवन के डर, असफलताएँ और पछतावे दिखाई देने लगे। झील ने उससे पूछा—
“क्या तू अपने बेटे के लिए स्वयं को खोने को तैयार है?”
राहू ने बिना हिचक कहा—“हाँ।”
तभी झील के जल से चाँदी-सा चमकता दर्पण प्रकट हुआ।
दूसरी वस्तु, सूर्य की धूपघड़ी, अग्नि पर्वत की चोटी पर थी। वहाँ समय उल्टा बहता था। कई योद्धा वहाँ पागल हो चुके थे। लेकिन राहू ने धैर्य नहीं खोया। उसने हर कदम सोच-समझकर रखा और अपने बेटे की मुस्कान को याद करते हुए धूपघड़ी को छू लिया। समय स्थिर हो गया।
तीसरी और सबसे कठिन खोज थी—तारों का जल। यह जल केवल रात के तीसरे पहर, आकाश से गिरता था। रास्ते में परियाँ, राक्षस और भ्रम फैलाने वाले जीव मिले, लेकिन राहू का प्रेम उसकी ढाल बन गया। अंततः उसने तारों से टपकता दिव्य जल एक पात्र में भर लिया।
रहस्योद्घाटन – अमरता का सच और मलकॉफ
जब तीनों वस्तुएँ एक साथ हुईं, तब प्रकट हुआ एक प्राचीन सत्य। एक गुप्त ग्रंथ से राहू को पता चला कि ये वस्तुएँ कभी एक महान ऋषि की थीं, जिन्हें दुष्ट जादूगर मलकॉफ ने चुरा लिया था। मलकॉफ सदियों से अमरता पाने की चाह में पागल हो चुका था। उसने वस्तुओं की शक्ति को तो समझा, लेकिन उनके मूल भाव को नहीं।
ग्रंथ में लिखा था—
“अमरता वह नहीं जो शरीर को अमर करे, बल्कि वह जो प्रेम को जीवित रखे।”
राहू समझ गया कि असली अमृत कोई तरल नहीं, बल्कि मानवता का प्रेम है। लेकिन मलकॉफ पहले ही अपनी काली सेना के साथ अमृत बनाने की तैयारी कर चुका था। यदि वह सफल हो गया, तो पूरी दुनिया अंधकार में डूब सकती थी।
राहू के पास दो रास्ते थे—
एक, वापस लौट जाना।
दूसरा, एक साधारण लकड़हारा होते हुए भी एक दुष्ट अमर जादूगर से टकराना।
उसने दूसरा रास्ता चुना।
संघर्ष – मलकॉफ का किला और अंतिम परीक्षा
मलकॉफ का किला काले पत्थरों से बना था, जिसके चारों ओर डरावनी चीखें गूँजती थीं। किले में प्रवेश करते ही भ्रमजाल शुरू हो गया। राहू को अपने बेटे की मृत्यु के दृश्य दिखाए गए, लेकिन उसने आँखें बंद कर लीं और मन में कहा—
“यह झूठ है।”
राक्षसों से उसकी तलवार नहीं, बल्कि उसका साहस टकराया। कई बार वह गिरा, घायल हुआ, लेकिन फिर उठा। अंततः वह कक्ष में पहुँचा जहाँ मलकॉफ अमृत की तैयारी कर रहा था। तीनों जादुई वस्तुएँ एक वेदी पर रखी थीं।
मलकॉफ हँसा—
“तू क्या जानता है अमरता के बारे में?”
राहू ने उत्तर दिया—
“तू अमर होना चाहता है, मैं अपने बच्चे को बचाना।”
यह संघर्ष केवल शक्ति का नहीं, अहंकार और प्रेम का था।
चरमोत्कर्ष – वस्तुओं का टूटना और प्रेम की शक्ति
जैसे ही मलकॉफ ने मंत्र पढ़ना शुरू किया, राहू ने एक असंभव निर्णय लिया। उसने एक-एक करके तीनों जादुई वस्तुओं को तोड़ दिया। पूरा कक्ष काँप उठा। वस्तुओं से एक उज्ज्वल ऊर्जा निकली—शुद्ध, गर्म और जीवन से भरी।
मलकॉफ चीख उठा, क्योंकि उसकी सदियों की लालसा टूट चुकी थी।
वही ऊर्जा जंगल, गाँव और अंततः अविर तक पहुँची।
झोपड़ी में लेटा अविर अचानक उठ बैठा। उसकी आँखों में चमक लौट आई। बीमारी मानो कभी थी ही नहीं।
अमरता किसी को नहीं मिली—लेकिन जीवन बच गया।
समापन – वीरता का गान और सच्ची अमरता
राहू अपने स्वस्थ बेटे के साथ गाँव लौटा। मलकॉफ अपने ही अहंकार में कैद होकर इतिहास बन गया। गाँव वालों ने राहू को राजा बनने को कहा, लेकिन उसने मुस्कराकर मना कर दिया।
उसकी कहानी पीढ़ियों तक सुनाई गई—
कि अमरता तलवार, जादू या वस्तुओं में नहीं,
प्रेम, त्याग और मानवता में छिपी होती है।
