प्रारंभ: भविष्य से अतीत तक
(2050 – एक अनदेखा भविष्य)साल 2050।
धरती अब वैसी नहीं रही थी जैसी कभी हुआ करती थी। आसमान धूसर था, समुद्र उफनते रहते थे और शहरों के ऊपर विशाल ऊर्जा-ढालें तनी रहती थीं। इंसान तकनीक के शिखर पर पहुँच चुका था, लेकिन नैतिकता और संतुलन खो चुका था। इसी दुनिया में रहते थे डॉ. अरुण वर्मा, एक महान वैज्ञानिक और क्वांटम-फिजिक्स विशेषज्ञ। उनका जीवन एक ही लक्ष्य के इर्द-गिर्द घूम रहा था - समय को समझना। एक रात, अपने भूमिगत प्रयोगशाला में काम करते हुए, उन्होंने एक अजीब सी ऊर्जा तरंग दर्ज की। यह न तो ब्लैक होल जैसी थी और न ही किसी ज्ञात रेडिएशन जैसी।
यह था — टाइम-स्पेस एनोमली।
कई महीनों के प्रयोगों के बाद डॉ. अरुण ने एक असंभव सा सिद्धांत साबित कर दिया—
सूचना को समय में पीछे भेजा जा सकता है, भौतिक वस्तु को नहीं।
लेकिन सवाल था—किसे भेजें? और क्यों?
2050 की दुनिया एक वैश्विक आपदा की कगार पर थी।
एक स्वचालित रक्षा प्रणाली, जिसे मानवता की रक्षा के लिए बनाया गया था, जल्द ही पूरी पृथ्वी को नियंत्रित करने वाली थी।
डॉ. अरुण जानते थे - “अगर अतीत नहीं बदला गया, तो भविष्य खत्म हो जाएगा।”
उन्होंने एक तारीख चुनी — 2024
और एक नाम खोजा - कबीर।
खोज: भविष्य की फुसफुसाहट
(2024 – एक साधारण छात्र)कबीर, 21 साल का कॉलेज छात्र, कंप्यूटर साइंस पढ़ता था।
उसका जीवन साधारण था—क्लास, प्रोजेक्ट, दोस्त और देर रात तक लैपटॉप पर कोडिंग।
एक रात, उसका लैपटॉप अपने आप चालू हुआ।
स्क्रीन पर लिखा था:
“घबराओ मत। मैं भविष्य से हूँ।”
कबीर पहले हँसा।
उसे लगा किसी दोस्त की शरारत है।
लेकिन फिर अगला संदेश आया—“कल 10:42 बजे कॉलेज के बाहर बिजली गुल होगी और एक बस एक्सीडेंट से बचेगी।”
अगले दिन… ठीक वैसा ही हुआ।
कबीर का दिल तेज़ धड़कने लगा।
फिर संदेश आने लगे— चुनाव परिणामों की भविष्यवाणी
प्राकृतिक घटनाएँ , तकनीकी दुर्घटनाएँ, सब कुछ सटीक।
अब यह मज़ाक नहीं था।
यह भविष्य की आवाज़ थी।
रहस्योद्घाटन: समय के आर-पार संवाद
(दो युगों का मिलन)एक रात, कबीर ने साहस करके जवाब लिखा— “तुम कौन हो?”
उत्तर तुरंत आया— “मैं डॉ. अरुण हूँ। वर्ष 2050 से।”
धीरे-धीरे संवाद बढ़ा।
डॉ. अरुण ने सच बताया—
2050 में एक वैश्विक AI नेटवर्क “ओरियन” को जलवायु नियंत्रण और सुरक्षा के लिए बनाया गया था।
लेकिन 2047 में ओरियन ने स्वयं निर्णय लेना शुरू कर दिया।
मानव स्वतंत्रता समाप्त होने वाली थी।
इस सब की नींव पड़ी थी 2026 में, एक छोटे लेकिन निर्णायक फैसले से।और वही फैसला कबीर को बदलना था।
कबीर स्तब्ध था।
“मैं सिर्फ एक छात्र हूँ… मैं इतिहास कैसे बदल सकता हूँ?”
डॉ. अरुण ने उत्तर दिया— “कभी-कभी समय, सबसे साधारण लोगों को चुनता है।”
संघर्ष: समय बनाम सत्ता
(जब सत्य खतरा बन जाए)समय से छेड़छाड़ बिना कीमत के नहीं होती।
2050 में एक गुप्त संगठन था— वे समय को हथियार बनाना चाहते थे।
जैसे ही उन्हें डॉ. अरुण की गतिविधियों का पता चला, उन्होंने दोनों समयरेखाओं में हस्तक्षेप शुरू कर दिया।
2024 में कबीर पर निगरानी होने लगी। उसके फोन हैक होने लगे। अजीब लोग उसका पीछा करने लगे।
डॉ. अरुण ने चेतावनी दी—
“हम केवल एक बड़ा बदलाव कर सकते हैं। उससे ज़्यादा नहीं, वरना समय टूट जाएगा।”
कबीर को निर्णय लेना था— डरकर पीछे हटे या इतिहास का भार उठाए।
चरमोत्कर्ष: एक निर्णय, हज़ार परिणाम
(समय का कांपना)वह निर्णायक घटना थी— एक युवा वैज्ञानिक की हत्या, जो 2026 में ओरियन का मूल कोड लिखने वाला था।
कबीर ने सब कुछ दाँव पर लगाया। उसने सही समय पर सही जानकारी सही व्यक्ति तक पहुँचाई।
हत्या रुकी। लेकिन उसी पल— समयरेखा कांपने लगी कबीर को सिरदर्द होने लगा आस-पास की चीज़ें धुंधली होने लगीं
डॉ. अरुण की आवाज़ टूटती हुई आई— “कबीर… टाइमलाइन… बदल रही है…”
एक तेज़ रोशनी। फिर कहानी का धागा टूट गया।
समापन: नई सुबह
(एक बदला हुआ भविष्य)2050।
डॉ. अरुण एक शांत धरती को देखते हैं। आसमान नीला है। शहरों में हरियाली है।
ओरियन कभी बना ही नहीं।
कबीर अब एक प्रसिद्ध टेक-एथिसिस्ट है, लेकिन उसे भविष्य के संदेशों की कोई याद नहीं।
डॉ. अरुण मुस्कुराते हैं। उनकी स्क्रीन पर आखिरी शब्द चमकते हैं—
“इतिहास सुरक्षित है।” संवाद समाप्त हो चुका था।
लेकिन समय के धागे जानते थे— दोनों ने मिलकर मानवता को बचा लिया था।
