राजू वह बैग घर ले आता है और अपनी माँ को सारी बात बताता है। बैग की तह में एक पुराना पत्र मिलता है, जो इस कहानी को नया मोड़ देता है। पत्र से पता चलता है कि यह खजाना गाँव के एक धनी व्यापारी का था, जिसे कई साल पहले लुटेरों ने लूट लिया था और वह रास्ते में ही मारा गया। यह जानकारी राजू के मन में दुविधा पैदा कर देती है। एक ओर पिता की बीमारी और गरीबी, दूसरी ओर किसी और की मेहनत की कमाई—राजू समझ जाता है कि यह सिर्फ धन नहीं, बल्कि सच और नैतिकता की परीक्षा है।
धीरे-धीरे गाँव में यह खबर फैल जाती है कि राजू के पास खजाना है। कुछ लोग उसे समझाते हैं कि किस्मत ने पहली बार उसका साथ दिया है और उसे यह धन अपने पास रख लेना चाहिए। वहीं कुछ बुजुर्ग और समझदार लोग उसे ईमानदारी का रास्ता चुनने की सलाह देते हैं। गाँव की चौपाल में इस विषय पर चर्चाएँ होने लगती हैं। राजू के मन में गहरा द्वंद्व चलता है—क्या सच का रास्ता चुनकर वह अपने पिता की जान खतरे में डाल दे, या खजाना रखकर अपने जमीर से समझौता करे? यही संघर्ष कहानी को गहराई देता है।
इसी बीच व्यापारी का पोता, जो अब एक बूढ़ा व्यक्ति है, गाँव आता है और अपने दादा के खोए हुए खजाने की तलाश की कहानी सुनाता है। राजू उससे मिलता है और सच्चाई बताने का साहस करता है। लेकिन हालात तब और कठिन हो जाते हैं जब कुछ लालची और बुरे लोग राजू को धमकाने लगते हैं। वे कहते हैं कि अगर उसने खजाना उन्हें नहीं दिया, तो उसके पिता का इलाज कभी नहीं हो पाएगा। यह समय राजू के चरित्र की असली परीक्षा का था, जहाँ डर, लालच और सच आमने-सामने खड़े थे।
अंततः राजू अपने मन की आवाज़ सुनता है और खजाना व्यापारी के पोते को लौटाने का फैसला करता है। जब वह खजाना लेकर उसे सौंपने जा रहा होता है, तभी वही बुरे लोग रास्ते में उसे रोक लेते हैं। स्थिति तनावपूर्ण हो जाती है, लेकिन तभी गाँव वाले एकजुट होकर राजू के समर्थन में खड़े हो जाते हैं। यह दृश्य दिखाता है कि सच और ईमानदारी कभी अकेली नहीं होती। गाँव वालों की मदद से राजू सुरक्षित खजाना सही व्यक्ति तक पहुँचाने में सफल होता है।
व्यापारी का पोता राजू की सच्चाई, साहस और ईमानदारी से अत्यंत प्रभावित होता है। वह इनाम स्वरूप खजाने का एक हिस्सा राजू को देता है और उसके पिता का पूरा इलाज करवाता है। राजू का परिवार सम्मान और सुकून के साथ जीवन जीने लगता है। “सच का खजाना” केवल सोने-चाँदी की कहानी नहीं, बल्कि यह संदेश देती है कि सच्चाई और नैतिकता ही जीवन का असली खजाना है। यह कहानी बच्चों और बड़ों सभी के लिए एक प्रेरणादायक हिंदी कथा है, जो सिखाती है कि सच का रास्ता कठिन जरूर होता है, लेकिन अंत में वही सबसे मूल्यवान साबित होता है।
