प्रारंभ: चंद्र वेधशाला का रहस्यमय सिग्नल
चंद्रमा की सतह पर स्थापित भारत की अत्याधुनिक वेधशाला — “लूनर डीप स्पेस ऑब्ज़र्वेटरी” — पृथ्वी से लगभग चार लाख किलोमीटर दूर, एक शांत लेकिन रहस्यमय दुनिया में स्थित थी। वहां का आकाश काला था, तारों से भरा हुआ, और पृथ्वी दूर नीले रत्न की तरह चमकती दिखाई देती थी। इस वेधशाला का मुख्य उद्देश्य था गहरे अंतरिक्ष से आने वाले रेडियो सिग्नलों और ऊर्जा तरंगों का अध्ययन करना।एक रात, जब पृथ्वी पर आधी दुनिया सो रही थी, वेधशाला में ड्यूटी पर तैनात वैज्ञानिकों की स्क्रीन पर अचानक एक अजीब पैटर्न उभरा। वह साधारण कॉस्मिक शोर नहीं था। उसमें एक लय थी, एक संरचना थी — मानो कोई संदेश हो। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सीमा वर्मा ने तुरंत उसे रिकॉर्ड करने का आदेश दिया। डेटा को डीकोड करने के लिए सुपरकंप्यूटर सक्रिय कर दिए गए।जैसे-जैसे कोड खुलता गया, वैज्ञानिकों की धड़कनें तेज होती गईं। संदेश में साफ़-साफ़ एक तारीख लिखी थी — वर्ष 2087। लेकिन अभी तो वर्ष 2055 चल रहा था। यह कैसे संभव था? और उससे भी बड़ा झटका तब लगा जब संदेश के अंत में डिजिटल हस्ताक्षर दिखाई दिए: “अरुण शर्मा”। डॉ. आर्यन शर्मा, जो वेधशाला के प्रमुख खगोल भौतिकी विशेषज्ञ थे, सन्न रह गए। उनकी पत्नी अभी गर्भवती थीं। उनके होने वाले बेटे का नाम उन्होंने अरुण रखने का निश्चय किया था। पर यह तो असंभव था — उनका बेटा अभी पैदा भी नहीं हुआ था।वेधशाला में सन्नाटा छा गया। यह कोई मज़ाक नहीं था। सिग्नल की ऊर्जा, उसकी दिशा, और उसकी संरचना साफ़ बता रही थी कि वह गहरे अंतरिक्ष से आया था — और शायद भविष्य से भी।
जब पूरा संदेश अनुवादित हुआ, तो उसमें लिखा था:
“अगर तुम यह संदेश सुन रहे हो, तो समझो कि समय कम है। वर्ष 2087 में एक महाविनाशकारी ब्रह्मांडीय तूफान पृथ्वी की ओर बढ़ रहा है। इसे ‘डार्क फ्लक्स स्टॉर्म’ कहा जाता है। यह पृथ्वी के मैग्नेटिक फील्ड को तोड़ देगा। अरबों जीवन समाप्त हो जाएंगे।
— अरुण शर्मा”
संदेश के साथ खगोलीय निर्देशांक और एक जटिल तकनीकी ब्लूप्रिंट भी संलग्न था।
डॉ. शर्मा की आंखों में भय और आश्चर्य एक साथ झलक रहे थे। क्या उनका अजन्मा पुत्र भविष्य में वैज्ञानिक बनेगा? क्या वह इस महाविनाश को देखेगा?
वैज्ञानिक समुदाय में यह खबर गुप्त रखी गई। लेकिन सरकार को सूचित करना आवश्यक था।
“यह एक धोखा हो सकता है,” एक अधिकारी ने कहा।
“या फिर कोई एलियन सिग्नल,” दूसरे ने जोड़ा।
लेकिन डॉ. शर्मा ने शांत स्वर में कहा, “यह कोई मज़ाक नहीं है। यह एक चेतावनी है। अगर यह सत्य है, तो हमारे पास केवल 32 वर्ष हैं तैयारी के लिए।” डार्क फ्लक्स स्टॉर्म एक ऐसा ऊर्जा तूफान था, जो ब्लैक होल्स के विलय से उत्पन्न होता है। उसकी रेडिएशन पृथ्वी की ओज़ोन परत और मैग्नेटिक शील्ड को चकनाचूर कर सकती थी। सरकार ने आधिकारिक रूप से इसे “असत्य और असंभव” घोषित कर दिया। मीडिया में डॉ. शर्मा को पागल करार दिया गया।
सरकार ने घबराकर डॉ. शर्मा और अरुण को बुलाया।
उनकी तकनीक तैयार थी — एक विशाल क्वांटम रिएक्टर जो पृथ्वी के मैग्नेटिक फील्ड को सशक्त कर सकता था।
तूफान के पृथ्वी से टकराने से कुछ मिनट पहले, पिता-पुत्र ने सिस्टम सक्रिय किया।
आकाश में अजीब रोशनी फैल गई। ऊर्जा तरंगें टकराईं। कुछ क्षणों के लिए लगा कि सब खत्म हो जाएगा।
लेकिन फिर — शांति। तूफान बिखर चुका था। पृथ्वी सुरक्षित थी।
“अब समय है संदेश भेजने का।”
उन्होंने वही क्वांटम कम्युनिकेशन डिवाइस सक्रिय किया और वर्ष 2055 में सिग्नल भेज दिया।
समय का चक्र पूर्ण हुआ। पृथ्वी बच गई। मानवता ने विज्ञान पर विश्वास करना सीखा।
खोज: भविष्य से आया संदेश
अगले कई दिनों तक वैज्ञानिकों ने उस सिग्नल की परतें खोलने में खुद को झोंक दिया। क्वांटम कम्युनिकेशन, टाइम-डायलेशन थ्योरी, वर्महोल हाइपोथीसिस — हर संभावना पर विचार हुआ।जब पूरा संदेश अनुवादित हुआ, तो उसमें लिखा था:
“अगर तुम यह संदेश सुन रहे हो, तो समझो कि समय कम है। वर्ष 2087 में एक महाविनाशकारी ब्रह्मांडीय तूफान पृथ्वी की ओर बढ़ रहा है। इसे ‘डार्क फ्लक्स स्टॉर्म’ कहा जाता है। यह पृथ्वी के मैग्नेटिक फील्ड को तोड़ देगा। अरबों जीवन समाप्त हो जाएंगे।
— अरुण शर्मा”
संदेश के साथ खगोलीय निर्देशांक और एक जटिल तकनीकी ब्लूप्रिंट भी संलग्न था।
डॉ. शर्मा की आंखों में भय और आश्चर्य एक साथ झलक रहे थे। क्या उनका अजन्मा पुत्र भविष्य में वैज्ञानिक बनेगा? क्या वह इस महाविनाश को देखेगा?
वैज्ञानिक समुदाय में यह खबर गुप्त रखी गई। लेकिन सरकार को सूचित करना आवश्यक था।
रहस्योद्घाटन: ब्रह्मांडीय तूफान की चेतावनी
सरकार के समक्ष प्रस्तुति दी गई। रक्षा मंत्री, वैज्ञानिक सलाहकार, और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सदस्य उपस्थित थे।“यह एक धोखा हो सकता है,” एक अधिकारी ने कहा।
“या फिर कोई एलियन सिग्नल,” दूसरे ने जोड़ा।
लेकिन डॉ. शर्मा ने शांत स्वर में कहा, “यह कोई मज़ाक नहीं है। यह एक चेतावनी है। अगर यह सत्य है, तो हमारे पास केवल 32 वर्ष हैं तैयारी के लिए।” डार्क फ्लक्स स्टॉर्म एक ऐसा ऊर्जा तूफान था, जो ब्लैक होल्स के विलय से उत्पन्न होता है। उसकी रेडिएशन पृथ्वी की ओज़ोन परत और मैग्नेटिक शील्ड को चकनाचूर कर सकती थी। सरकार ने आधिकारिक रूप से इसे “असत्य और असंभव” घोषित कर दिया। मीडिया में डॉ. शर्मा को पागल करार दिया गया।
संघर्ष: विश्वास बनाम व्यवस्था
डॉ. शर्मा ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने निजी संसाधनों से रिसर्च शुरू की। उनकी पत्नी ने उनका साथ दिया, भले ही समाज उन्हें तिरस्कार की नजर से देख रहा था। उन्होंने संदेश में दिए गए ब्लूप्रिंट का अध्ययन किया। वह एक “मैग्नेटिक क्वांटम शील्ड” का डिजाइन था — एक ऐसी तकनीक जो पृथ्वी के चारों ओर कृत्रिम ऊर्जा कवच बना सकती थी। वर्ष बीतते गए। अरुण का जन्म हुआ। बचपन से ही वह असाधारण प्रतिभाशाली था। उसे तारों में गहरी रुचि थी। डॉ. शर्मा ने कभी उसे भविष्य के संदेश के बारे में नहीं बताया। लेकिन जब अरुण 18 वर्ष का हुआ, तो उन्होंने सच्चाई सामने रखी। अरुण ने शांत स्वर में कहा, “अगर मैंने भविष्य में यह संदेश भेजा है, तो इसका मतलब है कि हमें यह करना ही होगा।”चरमोत्कर्ष: समय से दौड़
वर्ष 2086। खगोलीय उपकरणों ने पुष्टि की कि डार्क फ्लक्स स्टॉर्म वास्तव में पृथ्वी की ओर बढ़ रहा है।सरकार ने घबराकर डॉ. शर्मा और अरुण को बुलाया।
उनकी तकनीक तैयार थी — एक विशाल क्वांटम रिएक्टर जो पृथ्वी के मैग्नेटिक फील्ड को सशक्त कर सकता था।
तूफान के पृथ्वी से टकराने से कुछ मिनट पहले, पिता-पुत्र ने सिस्टम सक्रिय किया।
आकाश में अजीब रोशनी फैल गई। ऊर्जा तरंगें टकराईं। कुछ क्षणों के लिए लगा कि सब खत्म हो जाएगा।
लेकिन फिर — शांति। तूफान बिखर चुका था। पृथ्वी सुरक्षित थी।
समापन: अंतिम संदेश का अर्थ
कुछ वर्षों बाद, अरुण ने अपने पिता से कहा,“अब समय है संदेश भेजने का।”
उन्होंने वही क्वांटम कम्युनिकेशन डिवाइस सक्रिय किया और वर्ष 2055 में सिग्नल भेज दिया।
समय का चक्र पूर्ण हुआ। पृथ्वी बच गई। मानवता ने विज्ञान पर विश्वास करना सीखा।
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