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रामप्रसाद ने अपने बच्चों को समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन कोई असर नहीं हुआ। मोहन सोचता था कि वह बड़ा है इसलिए उसकी बात मानी जानी चाहिए, जबकि सोहन को लगता था कि उसे हमेशा नजरअंदाज किया जाता है। पत्नी भी तनाव में रहने लगी और घर में खुशियाँ खत्म होती जा रही थीं। एक दिन खेत में काम करते समय रामप्रसाद को एक विचार आया। उसने सोचा कि अब बच्चों को समझाने के लिए कुछ अलग तरीका अपनाना पड़ेगा। शाम को जब सब घर आए, तो उसने सबको बुलाया और एक लकड़ियों का गट्ठर लेकर आया। उसने कहा—"आज मैं तुम्हें एक छोटी सी सीख देना चाहता हूँ।"
रामप्रसाद ने पहले मोहन को एक लकड़ी दी और कहा इसे तोड़ो। मोहन ने आसानी से उसे तोड़ दिया। फिर सोहन को भी एक लकड़ी दी, उसने भी उसे तुरंत तोड़ दिया। अब रामप्रसाद ने पूरा गट्ठर मोहन को दिया और कहा—"इसे तोड़ो।" मोहन ने पूरी ताकत लगा दी, लेकिन वह गट्ठर नहीं तोड़ पाया। सोहन ने भी कोशिश की, लेकिन वह भी असफल रहा। तब रामप्रसाद ने शांत स्वर में कहा—"देखो, जब तुम अलग-अलग हो, तो कोई भी तुम्हें आसानी से तोड़ सकता है, लेकिन जब तुम एक साथ होते हो, तो कोई तुम्हें नहीं तोड़ सकता। यही परिवार की असली ताकत है।"
रामप्रसाद की बात सुनकर घर में सन्नाटा छा गया। दोनों भाइयों को अपनी गलती का एहसास हुआ। माँ की आँखों में आँसू आ गए, लेकिन इस बार वे खुशी के थे। मोहन और सोहन ने एक-दूसरे से माफी मांगी और गले मिल गए। उस दिन के बाद उन्होंने तय किया कि वे कभी झगड़ा नहीं करेंगे और हर समस्या का हल मिलकर निकालेंगे। घर का माहौल फिर से पहले जैसा हो गया—खुशहाल और प्यार भरा। छोटी-छोटी बातें अब झगड़े की वजह नहीं बनती थीं, बल्कि हँसी का कारण बन जाती थीं।
समय बीतता गया और परिवार पहले से ज्यादा मजबूत होता गया। जब भी कोई समस्या आती, तो सब मिलकर उसका सामना करते। गाँव के लोग भी इस परिवार की मिसाल देने लगे। उन्होंने देखा कि कैसे एक परिवार, जो टूटने की कगार पर था, आज सबसे मजबूत बन गया है। रामप्रसाद गर्व महसूस करता था कि उसके बच्चों ने उसकी सीख को समझा और अपनाया। अब उनके घर में सिर्फ खुशियाँ ही खुशियाँ थीं। यह परिवार दूसरों के लिए प्रेरणा बन गया।
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि परिवार की असली ताकत एकता और प्रेम में होती है। अगर हम एक-दूसरे का साथ दें और समझदारी से काम लें, तो कोई भी मुश्किल हमें हरा नहीं सकती। जीवन में कई बार मतभेद आते हैं, लेकिन अगर हम उन्हें समझदारी से सुलझाएं, तो हमारा रिश्ता और भी मजबूत हो जाता है। इसलिए हमेशा अपने परिवार को प्राथमिकता दें, क्योंकि वही आपकी सबसे बड़ी ताकत है।