घायल पंखों की पुकार
एक दिन सुबह-सुबह, जब ओस की बूँदें पत्तों पर मोतियों की तरह चमक रही थीं, लिली अपने घर के पीछे बने छोटे से बगीचे में घूम रही थी। तभी उसे झाड़ियों के पास से हल्की-सी कराहने की आवाज़ सुनाई दी। वह ठिठक गई। आवाज़ में दर्द था, जैसे कोई मदद के लिए पुकार रहा हो। उसने धीरे-धीरे झाड़ियों को हटाया तो देखा—एक छोटा सा पक्षी ज़मीन पर गिरा हुआ था। उसका एक पंख बुरी तरह से चोटिल था और वह उड़ने की कोशिश में बार-बार गिर जा रहा था। उसकी आँखों में भय और पीड़ा साफ दिखाई दे रही थी। लिली का दिल पिघल गया। उसने चारों ओर देखा—कोई और नहीं था। वह समझ गई कि अगर उसने अभी कुछ नहीं किया, तो यह नन्हा प्राणी शायद बच नहीं पाएगा। उसने बहुत सावधानी से उस पक्षी को अपनी हथेलियों में उठाया। उसकी धड़कनें तेज़ थीं, लेकिन लिली की हथेलियों की गर्माहट ने उसे थोड़ा शांत कर दिया। उस पल लिली ने तय कर लिया—वह इस छोटे से जीव की मदद करेगी, चाहे इसके लिए उसे कितनी भी मेहनत क्यों न करनी पड़े।
छोटी मदद की बड़ी शक्ति
लिली पक्षी को अपने घर ले आई। उसने अपनी माँ से सारी बात बताई। माँ ने उसकी पीठ थपथपाई और कहा, “बेटी, किसी की मदद करना सबसे बड़ा धर्म है।” उन्होंने मिलकर पक्षी के पंख पर हल्दी और तेल का लेप लगाया, उसे एक छोटे से डिब्बे में मुलायम कपड़े बिछाकर रखा ताकि वह सुरक्षित रहे। लिली ने उसे दाना-पानी दिया और पूरे दिन उसके पास बैठी रही। वह उससे धीरे-धीरे बातें करती, जैसे वह सब समझ रहा हो। कुछ ही घंटों में पक्षी का डर कम होने लगा। उसकी आँखों में अब थोड़ी-सी उम्मीद झलकने लगी थी। लिली को एहसास हुआ कि मदद का आकार मायने नहीं रखता, भावना रखती है। उस छोटे-से पक्षी की देखभाल करते हुए उसे यह समझ आया कि सबसे छोटा प्राणी भी हमारी दया और सहारे का हकदार है। कभी-कभी जीवन हमें ऐसे मौके देता है जहाँ हमारी छोटी-सी कोशिश किसी की पूरी दुनिया बदल सकती है। यह एहसास लिली के लिए किसी रहस्योद्घाटन से कम नहीं था।
सेवा, धैर्य और विश्वास
दिन ढल गया, रात आ गई। बाहर सन्नाटा था, लेकिन लिली की चिंता खत्म नहीं हुई थी। वह बार-बार उठकर देखती कि पक्षी ठीक है या नहीं। उसने उसके लिए थोड़ा-सा पानी रखा, दाना चुगाया और कपड़े को ठीक किया ताकि उसे ठंड न लगे। कई बार पक्षी दर्द से फड़फड़ाता और लिली की आँखें भर आतीं। लेकिन उसने हार नहीं मानी। उसने अपने छोटे भाई को समझाया कि वह शोर न करे, ताकि पक्षी आराम कर सके। पूरी रात वह उसके पास बैठी रही, मानो एक माँ अपने बच्चे की देखभाल कर रही हो। उसके मन में एक ही प्रार्थना थी—“हे भगवान, इसे ठीक कर दो।” संघर्ष सिर्फ पक्षी का नहीं था, लिली का भी था। नींद की कमी, चिंता और अनिश्चितता के बावजूद उसने धैर्य और विश्वास नहीं छोड़ा। उसे यकीन था कि सच्ची नीयत से की गई मदद कभी व्यर्थ नहीं जाती।
उड़ान की खुशी
अगली सुबह जब सूरज की पहली किरण कमरे में आई, लिली की आँख खुली। उसने देखा—पक्षी अपने डिब्बे के किनारे बैठा है और धीरे-धीरे अपने पंख हिला रहा है। उसकी आँखों में अब डर नहीं, चमक थी। लिली ने दरवाज़ा खोला और उसे खुले आँगन में रखा। कुछ क्षणों के लिए सब शांत था। फिर अचानक, पक्षी ने अपने दोनों पंख फैलाए और एक छोटी-सी छलांग लगाई। वह हवा में उठा… एक पल के लिए डगमगाया… और फिर पूरी ताकत से आसमान की ओर उड़ गया। लिली की आँखों में खुशी के आँसू आ गए। उसका दिल गर्व और संतोष से भर गया। वह समझ गई कि उसकी मेहनत रंग लाई। उस छोटे-से जीव की उड़ान में उसकी दयालुता की जीत थी।
दयालुता का जादू
उस दिन के बाद लिली के जीवन में एक नई रोशनी आ गई। उसने महसूस किया कि दयालुता सचमुच एक जादुई उपहार है। जब हम किसी की मदद करते हैं, तो सिर्फ सामने वाला ही नहीं, हमारा अपना दिल भी हल्का और खुश हो जाता है। लिली ने ठान लिया कि वह हमेशा दूसरों की सहायता करेगी—चाहे वह इंसान हो या कोई नन्हा जीव। उसके इस व्यवहार ने पूरे गाँव को प्रेरित किया। लोग अब एक-दूसरे की मदद करने लगे। गाँव पहले से ज्यादा सुंदर और खुशहाल हो गया। लिली ने सीखा कि छोटी-सी मदद भी बड़ा अंतर ला सकती है।
कहानी की सीख :-
दयालुता और करुणा से किया गया छोटा-सा कार्य भी किसी के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है। हमें हमेशा जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए, क्योंकि सच्ची खुशी दूसरों की सहायता में ही छिपी होती है।