वरुण स्वभाव से बहुत शांत और शर्मीला लड़का था। स्कूल में वह ज़्यादा दोस्तों से बात नहीं करता था, और जब भी क्लास में किसी से अपने विचार साझा करने की बारी आती, उसका गला सूखने लगता। उसकी दुनिया किताबों तक सीमित थी, क्योंकि किताबें उससे सवाल नहीं पूछती थीं। गर्मियों की छुट्टियों में वह अपने दादा के पुराने घर गया, जो शहर से दूर, एक शांत पहाड़ी इलाके में स्थित था। उस घर की सबसे रहस्यमय जगह थी अटारी — एक पुरानी लकड़ी की सीढ़ी से ऊपर जाने वाली धूल भरी जगह। एक दिन वरुण ने वहाँ सफाई करते हुए एक झूठी दीवार के पीछे छिपा हुआ दरवाज़ा देखा। दरवाज़ा खोलते ही उसके सामने एक गुप्त लाइब्रेरी प्रकट हुई। दीवारों तक फैली अलमारियाँ, मोमबत्तियों की हल्की रोशनी, और किताबों की ऐसी गंध जैसे समय खुद ठहर गया हो। उसी लाइब्रेरी के बीचोंबीच एक विशाल, मोटी किताब रखी थी, जिस पर जंग लगे ताले लगे थे। उसके कवर पर सुनहरे अक्षरों में लिखा था — “ड्रैकोनिस लिबरम”। किताब को छूते ही वरुण को अजीब-सी गर्माहट महसूस हुई, और जैसे भीतर से कोई दिल धड़क रहा हो। वह समझ गया कि यह कोई साधारण किताब नहीं थी।
खोज — स्याही का ड्रैगन
वरुण ने हिम्मत जुटाकर किताब का ताला खोला। आश्चर्य की बात यह थी कि किताब के पन्ने पूरी तरह खाली थे। न कोई अक्षर, न चित्र। निराशा के साथ उसने जैसे ही अपनी उँगलियाँ पन्नों पर रखीं, काले स्याही के छोटे-छोटे धब्बे उभरने लगे। वे धब्बे धीरे-धीरे फैलने लगे, जैसे किसी अदृश्य हाथ ने स्याही गिरा दी हो। अचानक स्याही पन्नों से बाहर निकलकर हवा में तैरने लगी और कुछ ही पलों में उसने एक छोटे, पारदर्शी ड्रैगन का रूप ले लिया। उसका शरीर स्याही से बना था, आँखों में डर और मासूमियत थी। वह घबराकर इधर-उधर देखने लगा और फिर किताब के भीतर वापस जाने की कोशिश करने लगा। वरुण डर गया, लेकिन भागा नहीं। पहली बार उसे लगा कि कोई है जो उससे भी ज़्यादा डरा हुआ है। उस पल वरुण के भीतर की जिज्ञासा डर से बड़ी हो गई। उसने धीमी आवाज़ में कहा, “डरो मत… मैं तुम्हें नुकसान नहीं पहुँचाऊँगा।”
रहस्योद्घाटन — भूली हुई कहानियों का रक्षक
ड्रैगन ने धीरे-धीरे बोलना शुरू किया। उसका नाम था इंकस्पॉट। उसकी आवाज़ ऐसी थी जैसे कागज़ पर पेंसिल चलने की हल्की खड़खड़ाहट। उसने बताया कि वह इस किताब का रक्षक है, और यह किताब दुनिया की उन कहानियों को समेटे हुए है जिन्हें लोग अधूरा छोड़ गए या पूरी तरह भूल गए। हर बार जब कोई कहानी भुलाई जाती है, उसका एक अंश इस किताब में कैद हो जाता है। लेकिन अब लोग कहानियाँ सुनाना बंद कर चुके हैं। मोबाइल स्क्रीन और जल्दबाज़ी की दुनिया में कल्पना के लिए जगह कम होती जा रही है। जैसे-जैसे कहानियाँ कम हुईं, किताब की स्याही सूखने लगी, और इंकस्पॉट भी कमजोर होता गया। वह डर रहा था, क्योंकि अगर किताब पूरी तरह खाली हो गई, तो उसका अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। वरुण पहली बार किसी ऐसे से मिला था जिसे उसकी ज़रूरत थी। किसी ने उससे कुछ माँगा था — उसकी कल्पना।
संघर्ष — स्याही सूखने का संकट
वरुण ने इंकस्पॉट को नई कहानियाँ सुनाने की कोशिश की, लेकिन उसकी कल्पना साथ नहीं दे रही थी। वह खुद को कमजोर और असमर्थ महसूस करने लगा। तभी लाइब्रेरी में ठंडक फैल गई और दीवारों से परछाइयाँ रेंगने लगीं। एक छायादार प्राणी प्रकट हुआ — स्टोरी-ईटर। उसका शरीर धुएँ और सन्नाटे से बना था। जहाँ वह गुजरता, किताबों के पन्ने सफेद और खाली हो जाते। वह उदासीनता और रचनात्मक डर का प्रतीक था। स्टोरी-ईटर किताब को निगलने लगा और इंकस्पॉट दर्द से कराह उठा। वरुण डर से काँपने लगा। उसे लगा कि वह कभी अच्छी कहानी नहीं बना पाएगा। उसके भीतर वही पुराना डर लौट आया — “मैं काफी नहीं हूँ।” लेकिन तभी उसने देखा कि इंकस्पॉट उसे भरोसे से देख रहा है। पहली बार किसी ने उस पर विश्वास किया था।
चरमोत्कर्ष — दोस्ती की कहानी का जादू
वरुण को अचानक एहसास हुआ कि उसे कोई महान कहानी नहीं बनानी है। उसे सिर्फ सच्ची कहानी सुनानी है। उसने इंकस्पॉट को अपनी कहानी सुनानी शुरू की — एक ऐसे बच्चे की कहानी जो हमेशा चुप रहता था, जिसे दोस्त बनाने में डर लगता था, और जो किताबों में अपनी शरण ढूँढता था। उसने बताया कि कैसे वह अकेला महसूस करता था, और कैसे आज पहली बार उसे कोई मिला है जो उसे समझता है। जैसे-जैसे वह बोलता गया, किताब के पन्नों पर सुनहरी स्याही से शब्द उभरने लगे। इंकस्पॉट का शरीर चमकने लगा, वह बड़ा और मजबूत होने लगा। उसकी आँखों में आत्मविश्वास लौट आया। स्टोरी-ईटर सच्ची भावना के सामने टिक नहीं सका। वह चीखता हुआ धुएँ में बदलकर गायब हो गया। लाइब्रेरी फिर से जीवंत हो उठी।
समापन — जीवंत किताब और हमेशा का दोस्त
अब किताब पूरी तरह जीवित थी। उसके पन्नों पर वरुण और इंकस्पॉट की कहानी चमक रही थी। इंकस्पॉट ने बताया कि अब वह किताब में कैद नहीं है। वह आज़ाद है, लेकिन उसने वरुण के साथ रहने का फैसला किया। उसने वरुण को बताया कि अब वह किसी भी किताब की दुनिया में यात्रा कर सकता है। उन्होंने एक वादा किया — वरुण हर रात एक नई कहानी सुनाएगा, चाहे वह अपनी हो या कल्पना की। बदले में, इंकस्पॉट उसे किताबों के अनगिनत जादुई संसारों में ले जाएगा। उस दिन के बाद वरुण कभी खुद को अकेला नहीं समझा। उसने जान लिया कि उसकी कहानी भी मायने रखती है।
कहानी की सीख:-
महान बनने के लिए महान कहानी नहीं, सच्ची भावना चाहिए।
हर इंसान की अपनी कहानी होती है, और वही उसकी सबसे बड़ी ताकत होती है।
जब हम अपनी बात कहने से डरना छोड़ देते हैं, तभी सच्चा जादू जन्म लेता है।
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